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शिमला के एक टीवी पत्रकार को आपके मदद की जरुरत है

एक ईमानदार और बुलंद आवाज़ बीमारी के आगे लाचार , अधरंग के बाद अब लिवर पर मंडरा रहा कैंसर का खतरा , शिमला के टीवी पत्रकार रमेश चंद वर्मा को है आपके मदद की जरुरत भले ही **आधे शरीर ने काम करना बंद कर दिया हो* लेकिन **उन्होंने अपनी कलम नहीं छोड़ी। यह कहानी है **रमेश चंद वर्मा** की।रमेश वर्मा इस समय **शिमला के पंथाघाटी** में रहते हैं और मूल रूप से **जिला हमीरपुर (तहसील बड़सर) के गांव सयोकड़, डाकघर जोड़े अम्ब** के रहने वाले हैं। उन्होंने **2002 से 2011 तक कई राष्ट्रीय समाचार चैनलों** – जैन टीवी, जनमत टीवी, लाइव इंडिया टीवी और पी.7 न्यूज़ में बतौर रिपोर्टर काम किया।

कभी कैमरे के सामने खड़े होकर समाज की आवाज़ उठाने वाला यह पत्रकार आज खुद जिंदगी की जंग लड़ रहा है। 2011 में अचानक उन्हें अधरंग (पैरालिसिस) हो गया** और उनका आधा शरीर काम करना बंद कर गया। उसके बाद से उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। घर की पूरी जिम्मेदारी उनकी पत्नी के कंधों पर आ गई। आज उनकी पत्नी **एक निजी अस्पताल में मात्र ₹10,000 महीने की नौकरी** कर रही हैं।

 

* पिता के इलाज के लिए **बेटी की पढ़ाई बीच में छूट गई**
* **बेटा अभी कमाने लायक नहीं हुआ**
* और घर में हर दिन दवाइयों और इलाज की चिंता

अब डॉक्टरों ने बताया है कि **रमेश वर्मा के लीवर की पाइप में टिश्यू बन गए हैं**, जिससे संक्रमण फैल रहा है।
अगर समय रहते इलाज नहीं हुआ तो यह **कैंसर का रूप भी ले सकता है। इस समय उनका इलाज **पीजीआई चंडीगढ़** में चल रहा है।
डॉक्टरों ने **PET Scan सहित कई जरूरी जांचें तुरंत करवाने को कहा है।

  • अब तक **शिमला और पीजीआई में करीब ₹5 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं**।
    परिवार ने कर्ज लिया, रिश्तेदारों से मदद ली — लेकिन अब सारे रास्ते बंद हो चुके हैं।हर महीने इलाज और जांच में **₹25,000 से अधिक खर्च** हो रहा है।

    जिस पत्रकार ने कभी समाज की आवाज़ उठाई…
    आज वही पत्रकार **मदद के लिए समाज की ओर देख रहा है।**

    **आपकी छोटी-सी मदद उनकी जिंदगी बचा सकती है।**

    अगर आप सहायता करना चाहें तो नीचे दी गई बैंक डिटेल पर सहयोग कर सकते हैं:

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